DNA ANALYSIS: कोरोना काल में श्रीकृष्ण के ‘दर्शन’, कोविड-19 से जूझने की शक्ति हैं ‘गोविंद’

News Nation

नई दिल्ली: भगवान श्री कृष्ण का एक नाम गोविंद भी है. इसलिए आप इसे Covid-19 के दौर में भगवान गोविंद के वो मंत्र भी कह सकते हैं. जिनसे आपका जीवन और आपकी सोच हमेशा के लिए बदल जाएगी. दरअसल, Covid-19 के दौर में सबको अपना जीवन अंधकार में डूबा हुआ दिख रहा है. कोरोना वायरस के रूप में सामने एक ऐसा शत्रु खड़ा है. जिसे आप देख तो नहीं सकते. लेकिन इस शत्रु ने आपके जीवन में उथल पुथल मचा दी है. ऐसा ही अंधकार अर्जुन के सामने भी था. उन्हें भी भविष्य स्पष्ट नहीं हो रहा था. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कौन शत्रु है और उनका कौन अपना है. भगवान कृष्ण ने अर्जुन को इस अंधकार से बाहर निकाला और इसी दौरान गीता के उपदेश दिए.

खराब समय हमेशा नहीं रहता
श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि समय सबका विनाश करने में समर्थ है और समय की मार से कोई नहीं बच सकता. इसका दूसरा अर्थ ये है कि अगर अभी समय ख़राब है तो ऐसा हमेशा नहीं रहेगा. समय के साथ ये वायरस भी समाप्त हो जाएगा और इससे जुड़ी परेशानियां और चुनौतियां भी.इसलिए आपको हताश या निराश होने की ज़रूरत नहीं है. 

उपलब्ध संसासधनों का उपयोग संकट में सोच-समझकर करें
आज के दौर में भगवान कृष्ण से ये सीखा जा सकता है कि हमें अपनी ऊर्जा व्यर्थ करने की ज़रूरत नहीं है और सारा ध्यान उस काम में लगाना चाहिए. जिसे करते हुए हम खुद को निखार सकते हैं. खुद को बेहतर बना सकते हैं । ऐसा इसलिए ज़रूरी है कि क्योंकि कोरोना वायरस के दौर में हमें नई चुनौतियों के साथ रहना भी है और इनसे लड़ना भी है. उदाहरण के लिए श्री कृष्ण की हत्या करने के लिए उस समय के शक्तिशाली राजा जरासंध ने मथुरा पर 18 बार आक्रमण किया था. कई युद्ध लड़कर उसे हराने के बाद श्रीकृष्ण ने इस अनावश्यक युद्ध से छुटकारा पाने का निर्णय लिया. जरासंध से बार-बार युद्ध करने के बजाए श्रीकृष्ण ने मथुरा को छोड़ दिया और नये युग के नगर को बसाया. जिसका नाम था द्वारिका… इस तरह उन्होंने सकारात्मक ऊर्जा का नाश करने वाली रणभूमि को छोड़ा और इसी वजह से उन्हें रणछोड़ भी कहा गया.

लीडरशिप क्वालिटी में अव्वल थे ‘कान्हा’
आज के समय में आपके पास जो संसाधन हैं आपको उनका इस्तेमाल सोच समझकर करना चाहिए और उपलब्ध संसाधनों को बर्बाद नहीं करना चाहिए. महाभारत के युद्ध में श्री कृष्ण ने ऐसा ही किया था. उन्हें पांच पांडव भाइयों को युद्ध का मार्ग दिखाया. जबकि उनके सामने सौ से ज़्यादा कौरव थे. श्री कृष्ण ने बहुत सोच समझकर अपने संसाधनों और ऊर्जा का प्रयोग किया और पांच पांडव 100 कौरवों पर भारी पड़े. ये श्री कृष्ण की वो Leadership Quality थी. जिसनें पांडवों को विजयी बनाया.

चौथी बात जो आप श्री कृष्ण के जीवन से सीख सकते हैं. वो ये है कि भगवान कृष्ण हमेशा अपने मित्रों की मदद के लिए तैयार रहते थे. द्रौपदी को चीर हरण से बचाकर और गांव वालों को कालिया नाग से मुक्ति दिलाकर उन्होंने ऐसा ही किया. भगवान श्री कृष्ण से सीखकर आप भी अपने मित्रों की रक्षा कर सकते हैं ऐसा करने के लिए आपको अपने मित्रों से सच बोलना होगा. अगर हमें कोरोना वायरस का संक्रमण हो जाए तो ये बात अपने दोस्तों से छिपानी नहीं है क्योंकि इस मामले में ईमानदार बनकर ही हम अपने दोस्तों का जीवन बचा सकते हैं.

संवाद के माहिर श्रीकृष्ण
भगवान कृष्ण से जो पांचवी और आख़िरी बात सीखी जा सकती है. वो ये है कि श्री कृष्ण संवाद में बहुत माहिर थे. इसी ताकत के दम पर उन्होंने कई विवाद भी सुलझाए. आज के दौर में जो व्यक्ति दूसरों तक अपनी बात बेहतर ढंग से पहुंचा सकता है. वो बहुत तरीके के दुष्प्रचार को रोक सकता है और सही जानकारियों से लोगों को अवगत करा सकता है. कोरोना वायरस के दौर में लोगों तक सही जानकारी, समय पर पहुंचाना सबसे ज़रूरी है.

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