DNA ANALYSIS: अब नदियों पर भी कंट्रोल चाहता है चीन?

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नई दिल्ली: भारत बाढ़ को रोकना चाहता है. लेकिन ऐसा कर नहीं पा रहा इसके विपरित भारत के पड़ोसी देश चीन पर ये आरोप लग रहे हैं कि वो बड़ी संख्या में बांध बनाकर अपने किसी पड़ोसी देश में बाढ़ के हालात पैदा कर देता है तो कभी सूखे के हालात पैदा कर देता है. कहा जाता है कि अगला वर्ल्ड वॉर पानी की वजह से होगा. लेकिन चीन अगला वर्ल्ड वॉर पानी से लड़ना चाहता है. इसलिए चीन की इस साजिश के बारे में भी आज आपको जानना चाहिए.

कुछ दिन पहले हमने आपको चीन की बाढ़ के बारे में बताया था, कि किस तरह से वहां पर 4 करोड़ से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. लेकिन चीन में बाढ़ की समस्या, सिर्फ इस साल की नहीं है, अब हर साल चीन में ऐसा ही होता है और इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि चीन ने पानी को हथियार बनाने के लिए बांधों का जो इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया था, वही बांधों का इंफ्रास्ट्रक्चर अब चीन पर भारी पड़ रहा है.

आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पिछले कई दशकों में चीन ने 87 हजार से ज्यादा बांध बनाए हैं. ये बहुत बड़ी संख्या है. लेकिन सवाल ये है कि चीन ने इतनी बड़ी संख्या में बांध क्यों बनाएं? आमतौर पर बांध इसलिए बनाए जाते हैं कि हम बाढ़ पर नियंत्रण कर सकें, पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए कर सकें, बिजली बना सकें और पानी का भंडारण कर सकें, लेकिन अपनी नदियों पर बांध बनाने का चीन का इरादा, कुछ और ही रहा है.

पानी को हथियार बनाने की चीन की चाल
असल में चीन पानी को हथियार बनाना चाहता है और इसके लिए वो बांध का सहारा लेता है. इसीलिए चीन ने इतनी बड़ी संख्या में बांध बनाए हैं. चीन के इरादों को आप तीन नदियों के उदाहरण से समझ सकते हैं. पहला उदाहरण चीन की सबसे बड़ी नदी यांगत्सी और उसकी सहायक नदियों का है, जहां पर आज से सात साल पहले तक 100 बांधों का निर्माण कार्य चल रहा था. अब आप सोचिए, सात साल बाद अब चीन ने यहां पर कितने बांध बना लिए होंगे.

इसी तरह से मिकॉन्ग नदी, जो एशिया की सातवीं बड़ी नदी है, और जो दक्षिण-पश्चिमी चीन से होकर म्यांमार, लाओस, थाईलैंड, कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों में भी बहती है, इस नदी पर भी चीन ने 11 बांध बनाए हैं. ये बांध चीन ने इसलिए बनाए, ताकि वो मिकॉन्ग नदी के पानी पर अपना नियंत्रण रख सके. मिकॉन्ग और उसकी सहायक नदियां, दक्षिण पूर्व एशिया के 6 करोड़ से ज्यादा लोगों की जीवन रेखा हैं और चीन इस नदी पर बांध के जरिए इन 6 करोड़ लोगों की किस्मत तय कर रहा है.

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आपको तीसरा उदाहरण बताते हैं. तीसरा उदाहरण ब्रह्मपुत्र नदी का है. तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन ने Zang-Mu (जांग मू) बांध बनाया है, जो 2015 में बनकर तैयार हुआ था. तिब्बत में चीन, इसी तरह के तीन और बांध, ब्रह्मपुत्र नदी पर बना रहा है. ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से निकलकर, अरुणाचल प्रदेश और असम सहित भारत के पूर्वोत्तर इलाकों में बहती है और इस पर बांध के जरिए चीन, जब चाहता है तब पूर्वोत्तर में बाढ़ ले आता है. यानी चीन इसे सामारिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल करता है.

नदियों पर भी चीन की दादागिरी
चीन ऐसा इसलिए कर पाता है, क्योंकि भौगोलिक स्थिति उसके पक्ष में है. ऐसी कई नदियों का उदगम चीन से होता है, जो वहां से बहकर 18 देशों में आती हैं. चीन के अलावा दुनिया में दूसरा ऐसा कोई देश नहीं है, जहां से नदियां बहकर, 18 देशों में जाती हैं. चीन ने इसी बात का फायदा उठाया और नदियों के पानी को कंट्रोल करने के लिए व्यापक डैम इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में जुट गया. इसी के सहारे चीन अब ये तय करता है कि उसके यहां से निकलने वाली नदियों का पानी, दूसरे देशों में कब, कहां और कितनी मात्रा में बहेगा.

नदियों पर बांध बनाकर चीन पानी को रोक लेता है और पानी को अपनी मर्जी से, जब चाहे तब छोड़ देता है. इसी से वो अपने पड़ोसी देशों में बाढ़ भी ला सकता है, और अगर वो चाहे तो, अपने पड़ोसी देशों में सूखा भी ला सकता और चीन से ऐसा किया भी है. हमने आपको मिकॉन्ग नदी के बारे में अभी बताया है, जो चीन से होकर, उसके आसपास के 18 देशों में बहती है. पिछले वर्ष इस नदी में पानी बहुत कम हो गया था, ये नदी सूखने लगी थी. तब चीन ने कम बारिश को इसका कारण बताया था. लेकिन इसका असली कारण चीन के बांध थे, जिन्होंने नदी के प्रवाह को रोक दिया और पर्यावरण के तंत्र को बर्बाद कर दिया.

चीन के बनाए बांधों की वजह से जब पिछले वर्ष मिकॉन्ग नदी का जलस्तर कम हुआ, तो चीन के पड़ोसी देशों में सूखा पड़ गया. जैसे थाईलैंड में 40 साल का सबसे बड़ा सूखा पड़ा. वहां पर चीनी उत्पादन 9 साल के निचले स्तर पर पहुंच गया, जबकि थाईलैंड दुनिया के सबसे बड़े चीनी निर्यातक देशों में एक है. यानी चीन की वजह से थाईलैंड को बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ. इसी तरह से सूखे की वजह से वियतनाम में चावल उत्पादन पर असर पड़ा. वहां धान की फसल को बहुत नुकसान पहुंचा. लाओस और कंबोडिया जैसे देशों में भी सूखे का ऐसा ही संकट देखा गया.

बाद में चीन के उस झूठ की पोल भी खुल गई थी, जिसमें उसने कम बारिश होने को, सूखा पड़ने का कारण बताया था. सैटेलाइट तस्वीरों से साबित हुआ था कि चीन ने पानी के प्रवाह को रोकने के लिए अपने बांधों का इस्तेमाल किया था बांध से नदी के पानी का प्रवाह रोककर, चीन ने अपने जलाशयों को भर लिया था. ये जलाशय पिछले वर्ष मई में खाली थे, लेकिन अगले कुछ महीनों में ये जलाशय भर गए. जबकि दूसरे देश इस पानी के लिए तरस रहे थे. जाहिर सी बात है कि चीन ने अपने यहां पानी रोककर, दूसरे देशों में सूखे की स्थिति बनाने के लिए ऐसा किया था.

एशिया में पानी का संकट
एशिया में वैसे भी पानी का बहुत बड़ा संकट है. पानी, तेल से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके बिना जीवन संभव नहीं है. ये भी कहा जाता रहा है कि 21वीं सदी में पानी के लिए ही युद्ध होंगे. और इस युद्ध के लिए सबसे पहले चीन ने खुद को तैयार किया है. यानी चीन अब अपना अगला युद्ध हथियारों से नहीं बल्कि पानी से लड़ेगा.

लेकिन पानी को हथियार बनाकर चीन, ना सिर्फ दूसरों के लिए संकट खड़ा कर रहा है. बल्कि अब वो खुद भी इस संकट में फंस गया है. चीन का एक बड़ा हिस्सा इस वक्त बाढ़ में डूबा है और चीन इसे पिछले 100 वर्षों की सबसे भयानक बाढ़ बता रहा है.

लेकिन इससे चीन पर ही सवाल उठ रहे हैं कि ये संकट उसने खुद बनाया है. वैसे ही जैसे उसने वुहान वायरस पूरे दुनिया में फैलाया. चीन के पूर्वी इलाके, मध्य इलाके और दक्षिण-पश्चिमी इलाके के कई शहर बाढ़ में डूब चुके हैं.

चीन की सबसे बड़ी नदी यांगत्सी के किनारे बसे गांवों, कस्बों और शहरों में हर जगह पानी भर गया है. ये नदी चीन की एक तिहाई आबादी की जीवनरेखा है, लेकिन इस पर सैकड़ों बांध बनाकर चीन ने लोगों का जीवन खतरे में डाल दिया है. चीन में अब ये स्थिति बन गई है कि पानी के दबाव को कम करने के लिए चीन को यांगत्सी नदी की एक सहायक नदी पर बने बांध को कुछ दिन पहले विस्फोटकों से उड़ाना पड़ा.

समस्या की जड़- थ्री गॉर्जेस डैम?
यांगत्सी नदी पर ही चीन का विशालकाय थ्री गॉर्जेस डैम बना है. जिसे बाढ़ का सबसे बड़ा कारण बताया गया है. क्योंकि ये कहा गया कि चीन ने इस बांध के टूटने के डर से जल्दबाजी में बांध के गेट खोल दिए थे.

दुनिया के सबसे बड़े बांध के तौर पर थ्री गॉर्जेस डैम को चीन अपनी शान बताता रहा है, और इस बांध को बनाने के खिलाफ उठने वाली आवाजों को चीन ने अनसुना कर दिया था. लेकिन अब यही बांध लोगों के लिए खतरा बन गया. इसे चीन में विनाश का बांध भी कहा जा रहा है.

इस बांध को चीन ने 17 साल में बनाकर तैयार किया था और इसकी वजह से चीन में 13 लाख से ज्यादा लोग विस्थापित हो गए थे, लेकिन जब से ये बांध बना है, चीन के 13 शहरों, 140 कस्बों में हर वर्ष भयानक बाढ़ आती है, इस वर्ष भी ऐसा ही हो रहा है.

हालात ये है कि अब इस खतरनाक स्थिति से निपटने के लिए चीन को अपनी सेना बुलानी पड़ी है. इस बांध के टूटने के डर से कुछ दिन पहले चीन ने फिर से इस बांध के गेट खोल दिए थे. जिससे एक बार फिर, आसपास के इलाकों में बाढ़ आ गई है.

चीन ने विकास के बांध नहीं, विनाश के बांध बनाए हैं. और ये बांध इसलिए बनाए, जिससे वो इन्हें रणनीतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल कर सके. लेकिन कहते हैं कि जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है, कभी ना कभी उस गड्ढे में खुद ही गिर जाता है. यही चीन के साथ हो रहा है.

चीन के सबसे लंबे बांध के टूटने का खतरा
हमने अभी आपको चीन के सबसे बड़े बांध के बारे में बताया, जिसके टूटने का खतरा बताया जा रहा है. अगर ये बांध कभी टूटा, तो चीन में पांच करोड़ से ज्यादा लोगों का जीवन खतरे में पड़ जाएगा. अब आप सोचिए कि चीन ने खुद के लिए कितना बड़ा संकट खड़ा कर दिया है. 

लेकिन ये कहानी सिर्फ एक बांध की नहीं है. चीन में ऐसे हजारों बांध हैं, जिनकी सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं. आपको ये सुनकर हैरानी होगी कि चीन में पुराने जमाने के ऐसे 94 हजार बांध हैं, जो मरणासन्न स्थिति में हैं यानी ये बांध कभी भी टूट सकते हैं.

इनमें ज्यादातर बांध ऐसे हैं, जो चीन के तानाशाह माओ के जमाने में बने हैं. इनमें कई छोटे बांध भी हैं, जो पिछले 50-60 वर्षों में धीरे-धीरे बहुत कमजोर हो चुके हैं और इनमें से ही कई बांध अब टूट कर गिर रहे हैं.

इसका एक उदाहरण दक्षिण चीन में बना एक बांध है, जो भारी बारिश की वजह से पिछले महीने ही टूट गया था. ये बांध वर्ष 1965 में बना था, लेकिन 55 साल पुराना ये बांध भारी बारिश के दबाव को बर्दाश्त नहीं कर पाया.

लेकिन चीन ने इस बांध के टूटने की खबर को दबा दिया. चीन अब अपने सबसे बड़े बांध के साथ ठीक यही कर रहा है. जिसे बढ़े हुए खतरनाक जलस्तर के बाद बहुत नुकसान हुआ है.

चीन की मजबूरी ये है कि वो इस बांध को अपनी राष्ट्रीय प्रतिष्ठा और शान का मुद्दा मानता है. इसलिए वो अपने बांधों की सुरक्षा का सच दुनिया से छुपाने की कोशिश कर रहा है.

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