DNA ANALYSIS: अंतरिक्ष में नासा का 9वां Mars Mission, मंगल पर उड़ेगा ‘हेलीकॉप्टर’

News Nation

नई दिल्ली: अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने मंगल ग्रह के लिए अपना नौंवा Mars Mission लॉन्च कर दिया है.  ये नासा के सबसे महत्वाकांक्षी Missions में से एक है और पूरी दुनिया की नजरें इस मिशन पर टिकी हैं. नासा ने इस मिशन का नाम Mars Mission 2020 दिया है.

Inge-Nuity नाम का छोटा हेलीकॉप्टर भी साथ में भेजा गया
इस मिशन की सबसे बड़ी ख़ासियत है एक छोटा सा हेलीकॉप्टर. जिसका नाम Inge-Nuity (इंजे न्यूटी) है. इस हेलिकॉप्टर का वजन दो किलोग्राम है. नासा ने एक वीडियो जारी करके बताया मंगल ग्रह पर ये छोटा हेलिकॉप्टर कैसे काम करेगा. नासा के मुताबिक ये हेलीकॉप्टर मंगल के वातावरण में उड़ान भरने के दौरान सतह से 10 फीट ऊंचा उठेगा और एक बार में 6 फीट आगे तक जाएगा. हर प्रयास के साथ ये और आगे बढ़ने की कोशिश करेगा और उड़ते हुए डेटा एकत्रित करेगा. 

हेलीकॉप्टर के पास उड़ान के लिए एक महीने का वक्त होगा
इस मिशन में हेलिकॉप्टर के पास उड़ान भरने के लिए एक महीने का वक्त होगा. नासा का कहना है कि अगर ये प्रयोग सफ़ल होता है तो भविष्य में अंतरिक्ष यात्रियों और Robots को मंगल ग्रह पर ऐसे हेलिकॉप्टर्स के ज़रिए एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते हुए देखा जा सकता है. 

Perseveranc नाम का रोवर भी मंगल ग्रह पर भेजा गया
नासा ने इस छोटे हेलीकॉप्टर के साथ इस मिशन में एक हज़ार किलोग्राम के वज़न का Perseveranc नाम का रोवर भी मंगल ग्रह पर भेजा है. ये रोवर परमाणु ऊर्जा से चलेगा. इसका मतलब ये हुआ कि पहली बार किसी रोवर में ईंधन के तौर पर प्लूटोनियम का उपयोग किया जा रहा है. ये रोवर मंगल ग्रह पर 10 वर्षों तक काम करेगा.

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मंगल ग्रह की आवाजें और तस्वीर रिकॉर्ड करेगा रोवर
इसमें रोवर में 7 फीट का रोबोटिक आर्म, 23 कैमरे, माइक्रोफोन और एक ड्रिल मशीन लगी है.  जिसकी मदद से रोवर, मंगल की तस्वीरें और वहां के वातावरण में मौजूद आवाज़ें रिकॉर्ड करेगा. ये रोवर मंगल ग्रह की चट्टानों से मिट्टी और पत्थर के नमूने भी इकट्ठा करेगा. जिससे मंगल पर प्राचीन काल में मानव जीवन होने का सबूत ढूंढा जाएगा.

मंगल पर गए छोटे हेलीकॉप्टर का ‘भारतीय’ कनेक्शन
मंगल पर भेजे गए हेलीकॉप्टर का भारतीय कनेक्शन भी है. इस हेलीकॉप्टर को Ingenuity नाम दिया गया है. जिसका मतलब होता है. किसी व्यक्ति का आविष्कारी चरित्र. मंगल पर गए हेलीकॉप्टर को ये नाम भारतीय मूल की एक छात्रा वनीजा रूपाणी ने दिया है. दरअसल नासा ने इस हेलीकॉप्टर के नामकरण के लिए एक प्रतियोगिता आयोजित की थी. जिसमें 28 हज़ार प्रतियोगी शामिल हुए थे. जिसमें वनीजा की ओर से सुझाए गए नाम को फाइनल किया गया.

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