सम्मानित व्यक्ति के लिए मौत के बराबर है ये चीज, गीता के इन 5 उपदेशों में छिपा है जीवन की सफलता का राज

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Bhagavad Gita

श्रीमद्भगवतगीता में जो भी उपदेश दिए गए हैं हर एक वचन में जीवन का एक सार छिपा हुआ है। जिस व्यक्ति ने इसे जान लिया वहीं व्यक्ति हमेशा सफलताओं की सीढ़ी में चढ़ता चला जाता है। गीता के इन वचनों के बारे में हर एक व्यक्ति को जानना बहुत ही जरूरी हैं तभी इंसान सही राह में चलकर खुशहाल जीवन जी सकता है। इसी क्रम में हम आज आपको बताने जा रहे हैं गीता के 5 अनमोल वचन जिन्हें जानकर आप हर परेशानियों से आराम से निकल सकते हैं। 

शक करने वाला कभी नहीं रह सकता खुश


सदैव संदेह करने वाले व्यक्ति के लिए प्रसन्नता ना इस लोक में है ना ही कहीं और। भगवान श्रीकृष्ण के इस कथन का मतलब है कि शक करने वाला व्यक्ति कहीं भी क्यों न रहे वो अपनी आदत से मजबूर होने की वजह से कहीं पर भी सुखी नहीं रह सकता। 

क्रोध सब कुछ कर देता है खत्म

क्रोध से भ्रम पैदा होता है। भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है। जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाता है। जब तर्क नष्ट होता है तब व्यक्ति का पतन हो जाता है। इस कथन का अर्थ है कि क्रोध सभी चीजों की जड़ है। क्रोध करने से सबसे पहले सोचने विचारने की शक्ति कम हो जाती है। इससे आप अपनी बात या अपने आप को साबित करने के लिए कोई भी तर्क नहीं दे पाएंगे। ऐसा होने का मतलब है कि मनुष्य का पतन हो चुका है।

मन को कंट्रोल न करना पड़ सकता है भारी

जो मन को नियंत्रित नहीं करते उनके लिए वह शत्रु के समान कार्य करता है। यानी कि अगर कोई भी व्यक्ति अपने मन पर कंट्रोल नहीं करता है तो वही मन उस व्यक्ति के लिए घातक हो सकता है। 

सम्मानित व्यक्ति के लिए मौत के बराबर है अपमान 

लोग आपके अपमान के बारे में हमेशा बात करेंगे। सम्मानित व्यक्ति के लिए, अपमान मृत्यु से भी बदतर है। कहने का मतलब है कि किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के लिए सबसे ज्यादा अहमियत उसका सम्मान होता है। जब उसे अपमान झेलना पड़ता है तो उसके लिए वो मरने जैसा है। 

स्वभाव के अनुसार ही इंसान करता है यकीन

हर व्यक्ति का विश्वास उसकी प्रकृति के अनुसार होता है। इस कथन का मतलब है कि हर व्यक्ति का स्वभाव अलग होता है। इसी तरह से उसके विश्वास करने का पैमाना भी अलग होता है। 

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