वेब सीरीज हो या फिर थियेटर, कहानी दमदार होनी चाहिए: सुष्मिता सेन

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एक कलाकार के रूप में अभिनेत्री सुष्मिता सेन को हमेशा अच्छे काम की तलाश रहती है। उनका मानना है कि उनके द्वारा लिए गए फैसले उन्हें उनके काम के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं। अभिनेत्री सुष्मिता सेन ने लंबे समय बाद वेब सीरीज ‘आर्या’ के साथ अभिनय की दुनिया में फिर से कदम रखा है। इसमें उनके अभिनय को काफी सराहा भी गया है। दिलचस्प बात यह है कि जब वह इंडस्ट्री में वापसी करने के लिए अच्छे प्रोजेक्ट्स तलाश रही थीं, तो आर्या से पहले उन्होंने कई प्रोजेक्ट्स को अस्वीकार किया था। वह इस बात से सहमत हैं कि बहुत बार न करने से लोग आपसे दूर हो जाते हैं। 

वह आगे जोड़ती हैं, ‘इस इंडस्ट्री में सबमें बहुत ज्यादा अहं है और यह किसी से छिपा नहीं है। हर बार जब आप किसी काम के लिए न करते हैं, तो वह आपके लिए एक परेशानी बन जाती है। इसका मतलब यह हो सकता है कि आपमें कोई समस्या है या आप काम नहीं करना चाहते हैं।’ हालांकि, सुष्मिता इस बारे में ज्यादा नहीं सोचतीं कि लोग उनके बारे में क्या सोचते हैं। वह कहती हैं, ‘मेरे लिए गए फैसले मुझे मेरे काम के प्रति ईमानदार और जिम्मेदार बनाते हैं। फिर चाहे वह अच्छा, बुरा या बेहद ही खराब, जो भी हो। मैंने इसे चुना है, इसलिए इसकी जिम्मेदारी मेरी है। कभी-कभी मेरे पास जिस प्रकार के काम आए, वे बहुत अच्छे नहीं थे। कई बार लोग कहते हैं कि हम इस इंडस्ट्री में बने रहने के लिए आपको मौका दे रहे हैं। ऐसी बातें मेरे साथ नहीं चलती हैं।’

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सुष्मिता ने कभी भी फिल्म इंडस्ट्री के  टॉप के पांच पायदानों को अपना लक्ष्य नहीं बनाया। लेकिन वह इस बात को स्वीकार करती हैं कि वह अच्छे काम की भूखी हैं। बकौल सुष्मिता,‘एक एक्टर के रूप में मैं हर प्रकार के वातावरण में काम करना पसंद करती हूं। मुझे ऐसा माहौल पसंद है, जहां -वाह… क्या शॉट दिया है- की प्रतिक्रियाओं के बजाय लोग मुझे यह भी बोल सकें कि मैं गलत कर रही हूं। ऐसे माहौल से ही मुझे प्रेरणा मिलती रही है, नहीं तो मैं भी एक अन्य कलाकार की तरह ही हूं, जो इस खेल में बने रहने के लिए कोशिश कर रहा है।’ सुष्मिता के लिए माध्यम के बजाय कहानी और पात्र मायने रखते हैं।  वह कहती हैं, ‘मुझे लगता है कि मेरी जो उम्र है, उसमें मुझे माध्यम उत्साहित नहीं करते हैं। मैं कहानियों, पात्रों, उन्हें बेहतर ढंग से पेश करने के तरीकों को लेकर उत्साहित रहती हूं, फिर चाहे वह ऑनलाइन माध्यमों पर हो या थियेटर में, मुझे इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता।’

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ऐसे समय में जब कई लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया बहुत विषैला हो गया है, सुष्मिता को लगता है कि अपने जैसा बने रहना मायने रखता है। वह जोड़ती हैं,‘किसी तरह की सोशल मीडिया मार्केटिंग भी इसे बदल नहीं सकती।’ वह आगे जोड़ती हैं,‘मैं हर मुद्दे पर हंगामा करने को आतुर नहीं रहती हूं। उदाहरण के लिए, हर बार जब देश में कुछ होता है, आप उसे महसूस करते हैं, लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं। लेकिन अगर मुझे किसी प्रकार का दुख है या कोई परेशानी है, तो उसे चिल्ला-चिल्ला कर कहना कोई हल नहीं है, इस बात का मैं समर्थन नहीं करती। सोशल मीडिया बेहतरीन जगह है… यह आपको सीमाओं से परे जोड़ने में मदद करता है, लेकिन अगर आप इसका उपयोग बुरी चीजों को बढ़ावा देने और नफरत फैलाने के लिए करते हैं, तो यह काफी दुखद है।’

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