नुसरत भरूचा ने कहा- मैंने अपनी असफल फिल्मों से बहुत सीख ली है

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बॉलीवुड एक्ट्रेस नुसरत भरूचा ने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। उन्हें भी शुरू में काफी संघर्ष करना पड़ा। हालांकि उन्होंने कभी हार नहीं मानी और हमेशा खुद को बेहतर करने पर ध्यान दिया। उन्होंने अपनी असफलताओं से बहुत कुछ सीखा और वह आज भी इसे बरकरार रखती हैं

नुसरत भरूचा ने फिल्म इंडस्ट्री से बाहर की होकर भी इंडस्ट्री में अपना एक नाम बनाया, लेकिन यह सब उनके लिए आसान नहीं था और जब स्थितियां खराब थीं, तो वह स्वीकार करती हैं कि वह भी इसके प्रभाव से अछूती नहीं रहीं। वह कहती हैं, ‘बेशक, चीजें हमारे पक्ष में बहुत बार नहीं जाती हैं… यह जीवन है। और जब मेरी फिल्में नहीं चलीं, तब मुझ पर भी इसका असर हुआ। तब मैंने परिवार और दोस्तों से सपोर्ट की उम्मीद की थी।’ आपको बता दें कि नुसरत  भरूचा ने ‘प्यार का पंचनामा (दोनों सिरीज)’ और ‘सोनू के टीटू की स्वीटी’ जैसी फिल्मों में अभिनय किया है।

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जबकि कई लोग अपने पेशेवर और व्यक्तिगत जीवन को अलग रखना पसंद करते हैं, 35 वर्षीया नुसरत का दृष्टिकोण अलग है। वह कहती हैं, ‘मैं समझ सकती हूं जब लोग कहते हैं कि आपके पेशे के लोग आपको उस तरह से नहीं जान पाएंगे जैसे आपके दोस्त या परिवार के लोग जानते हैं। लेकिन हमारे काम में कई ऐसी दोस्ती होती हैं, जो लंबे समय तक बरकरार रहती हैं और मैंने भी ऐसे कुछ दोस्त बनाए हैं, जिनपर मैं विश्वास कर सकती हूं।’ उनके लिए सही मिजाज रखना बेहद महत्वपूर्ण है। अपने संघर्ष के दिनों से काफी कुछ सीखने वाली अभिनेत्री कहती हैं, ‘अगर चीजों के गलत जाने पर आप अपना सिर ऊंचा नहीं रख सकते, तो आप कभी उन चीजों को नहीं संभाल पाएंगे, जो चीजें ठीक होने पर आपके साथ होंगी। मेरे करियर में, जब मेरी फिल्में असफल हुईं, तो उन्होंने मुझे बहुत कुछ सिखाया। मेरी सफल फिल्मों से ज्यादा मैंने उनसे सीखा। जब भी मैं किसी असफलता से सामना करती थी, मैं खुद पर और मेहनत करती थी और अपना काम बेहतर करने की कोशिश करती थी। मैं कोशिश करने में कभी नहीं चूकी। मैंने इन दोनों को मेरे बहुत करीब रखा- कोशिश करना और इसका नजरिया।’

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इस बीच नुसरत भरूचा कुछ समय पहले अपने एक प्रोजेक्ट की डबिंग के लिए घर से बाहर निकली थीं। उनके लिए यह अनुभव डरावना था। उन्होंने बताया, ‘मैंने चेक किया कि क्या कार को सैनिटाइज किया गया था और क्या ड्रावइर का चेकअप हुआ था। जब डबिंग रूम खुला, तो परिचित लोगों को देखना राहत की बात थी। मैं उन्हें गले लगाना चाहती थी, लेकिन मुझे अपनी भावनाएं नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।’

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