जामिया हिंसा पर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई, याचिकाकर्ता ने की SIT जांच की मांग

News Nation

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट में जामिया मिलिया इस्लामिया हिंसा मामले पर सुनवाई हुई. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि यूनिवर्सिटी के चीफ प्रॉक्टर ने ट्वीट करके जानकारी दी थी कि दिल्ली पुलिस को यूनिवर्सिटी कैम्पस में घुसने की इजाजत नहीं दी गई. लेकिन पुलिस अंदर यूनिवर्सिटी कैंपस में दाखिल हुई, यूनिवर्सिटी प्रशासन की इजाजत के बिना और इसके बाद छात्रों को पीटा गया. 

लाइब्रेरी में चिल्ली एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल हुआ और पुलिस ने अब इस मामले में जो चार्जशीट दाखिल की है उसमें 4 छात्रों पर बड़ी साजिश का आरोप लगाया है.

दरअसल, ये सच्चाई है ही नहीं. सच्चाई ये है कि पुलिस नाराज थी क्योंकि प्रदर्शनकारी संसद तक मार्च करना चाहते थे.

याचिकाकर्ता की मांग है कि इस मामले की जांच के लिए एक स्वतंत्र एसआईटी का गठन होना चाहिए. इस एसआईटी में न तो दिल्ली पुलिस और न ही केंद्र का कोई हो. तभी मामले की सच्चाई सामने आ पाएगी.

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से कहा कि पहले यह सिर्फ प्रदर्शन था. लेकिन बाद में इसने स्टूडेंट और पुलिस के बीच युद्ध का रूप ले लिया. पुलिस स्टूडेंट को सबक सिखाना चाहती थी ताकि भविष्य में कोई स्टूडेंट प्रदर्शन में शामिल न हो.

याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट से कहा कि छात्र में प्रदर्शन के दौरान सीएए विरोधी नारे लगा रहे थे और पुलिस ने इन्हें एंटी सोशल बता दिया. छात्रों की तरफ से पुलिस ने एक भी एफआईआर दर्ज नहीं की. इसके अलावा छात्रों के फोन और कैमरा पुलिस ने छीन लिए. एक तरह से पुलिस ने छात्रों को बंदी बना लिया. फिलहाल कोर्ट ने मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी है.

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